दरभंगा में शनिवार सुबह लगभग 6:30 बजे जब बेटी पिता को जगाने गई तो देखी की खून से लथपथ पिता का सर था और बंदूक की गोली सर के पास थी
मामला दरभंगा जिला के बिशनपुर थाना अंतर्गत रुपौली गांव की बताई जा रही है जहां शनिबार सुबह सवेरे एक परिवार में चीख पुकार मच गई जब राखी कुमारी अपने पिता सुरेंद्र ठाकुर को सुबह सवेरे उठने गई ! राखी कुमारी ने पाया कि मच्छरदानी लगी हुई है, कंबल ओढ़कर पिताजी सोए हुए हैं पर उठाने के बाद भी नहीं उठे तो राखी कुमारी ने पिताजी के शरीर से कंबल खींच तो देखा कि खून से लथपथ उनके पिता का सर है और सर के पास एक गोली है ! इतना देखते ही चीख पुकार मच गई ,आस पड़ोस के लोग इकट्ठा हो गए और पुलिस को सूचना दी गई ! मौके पर पुलिस पहुंची और छानबीन में जुट गई! मौके पर सिटी एसपी और FSL की टीम भी पहुंची और जांच में जुट गई! सिटी एसपी ने बताया कि मामला हत्या का है वहीं मृतक सुरेंद्र ठाकुर की पुत्री राखी कुमारी ने भी स्पष्ट शब्दों में बोली की साजिश के तहत उनके पिता की हत्या की गई है ! लगभग 1:00 बजे रात में जब उनकी चाची बाहर फूल तोड़ने निकली तो देखी की सुरेंद्र ठाकुर मोबाइल चला रहे हैं! इस अनुसार घटना को 2 बजे के बाद अंजाम दी गई होगी ! गोली चलने की आवाज नहीं सुनाई दी क्योंकि दुर्गा पूजा होने के कारण लगातार इलाका में साउंड बॉक्स लगा हुआ है ! वहीं मृतक की बेटी ने यह भी कहा कि पिछले 24 वर्षों से उनके पिता का जमीनी विवाद चल रहा है लेकिन किसने हत्या की, क्यों हत्या की यह भी जांच का विषय है? सुनिए क्या कुछ कह रही हैं की बेटी राखी कुमारी आपको यह भी बता दे कि पूरे मकान में तीन ही व्यक्ति रहते थे जीसमें एक मृतक सुरेंद्र ठाकुर दूसरा मृतक सुरेंद्र ठाकुर की बेटी राखी कुमारी की चाची और खुद मृतक की बेटी राखी कुमारी !
OM NEWS NETWORK | दरभंगा , बिहार






23 अक्टूबर को दरभंगा में लगेगा जॉब कैंप, 50 पदों पर होगी नियुक्ति
फ्रीडम एम्प्लॉयबिलिटी एकेडमी द्वारा शिक्षण सहित विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए होगा साक्षात्कार
स्नातक उत्तीर्ण 18 से 45 वर्ष के अभ्यर्थी ले सकेंगे भाग, जॉब कैंप में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क
दरभंगा, बिहार सरकार के युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, पटना के तत्वावधान में विश्वविद्यालय नियोजन सूचना एवं मार्गदर्शन केंद्र, दरभंगा के माध्यम से आगामी 23 अक्टूबर 2026 को आई.टी.आई,रामनगर के निकट संयुक्त श्रम भवन, दरभंगा स्थित कार्यालय परिसर में जॉब कैंप का आयोजन किया जाएगा।
फ्रीडम एम्प्लॉयबिलिटी एकेडमी द्वारा आयोजित इस जॉब कैंप में पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक शिक्षण (टीचिंग) सहित अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए साक्षात्कार लिया जाएगा। इसके तहत कुल 50 पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।
इन पदों के लिए स्नातक उत्तीर्ण अभ्यर्थी, जिनकी आयु 18 से 45 वर्ष के बीच है, आवेदन कर सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिमाह 14,500 रुपये के साथ अन्य भत्ते दिए जाएंगे।
नियुक्ति निजी संस्थानों में शिक्षक के रूप में की जाएगी। इसके लिए अभ्यर्थियों को ग्रेजुएशन एवं अंग्रेजी की जानकारी होना आवश्यक है।
इच्छुक अभ्यर्थियों वे अधिक से अधिक संख्या में जॉब कैंप में उपस्थित होकर रोजगार के अवसर का लाभ उठाएं। जॉब कैंप में भाग लेने के लिए नियोजनालय में निबंधन अनिवार्य है। अभ्यर्थी भारत सरकार के NCS पोर्टल (www.ncs.gov.in) पर स्वयं ऑनलाइन निबंधन कर सकते हैं अथवा नियोजनालय पहुंचकर निबंधन करा सकते हैं।
जॉब कैंप में शामिल होने वाले अभ्यर्थी अपना बायोडाटा तथा सभी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की छायाप्रति साथ लेकर आएं। जॉब कैंप में भाग लेना पूर्णतः निःशुल्क है।


दरभंगा: दुर्गा पूजा के मद्देनजर दरभंगा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फ्लैग मार्च निकाला। लहेरियासराय स्थित पुलिस लाइन से शुरू हुए इस मार्च में जिलाधिकारी, एसएसपी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए..फ्लैग मार्च लोहिया चौक, दारू भट्ठी चौक, करमगंज, रहमगंज, किला घाट, मशरफ बाजार, दरभंगा टावर, हसन चौक, आयकर चौराहा, नाका नंबर 5 और नाका नंबर 6 से होते हुए वापस पुलिस लाइन पहुंचा..पुलिस के मुताबिक, फ्लैग मार्च का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम करना है। प्रशासन ने त्योहार के दौरान शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है...
दुर्गा पूजा को लेकर दरभंगा पुलिस अलर्ट, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए निकाला फ्लैग मार्च
पुर्णिया की टीम ने भागलपुर को पराजित कर फाइनल में जगह बनाई
सिंहवाड़ा। प्रखंड क्षेत्र के हरिहरपुर में 49 वें वर्ष से जगदंबा खेल मैदान में आयोजित श्री श्री 108 दुर्गा पूजा फुटबॉल टूर्नामेंट के पहले सेमीफाइनल मैच में शनिवार को बीबीटी पूर्णिया एवं मुर्मू जूनियर एफसी भागलपुर के टीम के बीच खेला गया । पूर्णिया की टीम ने 03 - 01 से भागलपुर की टीम को हराकर फाइनल मैच में जगह बना ली। दर्शको से खचाखच भरे मैदान में दोनो ही टीम के खिलाड़ियों एवं उत्तरप्रदेश से पहुंचे रैफरी और सह रैफरी का खेल प्रेमियों ने स्वागत किया। खेल शुरू होते ही कुछ देर के संघर्ष के बाद पूर्णिया टीम की गलती के परिणामस्वरूप मिले दो फ्री हिट में से एक बॉल को गोल में बदलकर भागलपुर ने अपनी बढ़त बना ली। मध्यांतर के बाद पूर्णिया की टीम भी खेल में वापसी के लिए अच्छी तालमेल एवं सुझबुझ से खेलते हुए एक गोल भागलपुर की टीम पर कर खेल को बराबरी पर ला दी। लेकिन जुझारू मैच के बीच खेल के अंतिम क्षण में पूर्णिया की टीम ने निर्णायक एक और गोल भागलपुर की टीम पर कर दो- एक की बढ़त बना ली।इसी बीच एक और गोल कर पूर्णिया की टीम 3 - 1 से जीत दर्ज कर फाइनल में जगह सुरक्षित कर ली।आयोजन समिति के अभिषेक जॉनसन झा ने बताया की टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल मैच 18 अक्टूबर को जेपीएन क्लब सुपौल भीमनगर एवं एमएससी दरभंगा के बीच खेला जाएगा। मौके पर गंगा प्रसाद झा, रमानाथ झा,अनिल ठाकुर, मनोज कुमार झा आदि गणमान्य मौजूद थे।
हरिहरपुर में 49 वें वर्ष फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित



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दरभंगा को 1-0 से हराकर फाइनल में पहुंची सुपौल की टीम, फाइनल में पूर्णिया से होगा मुकाबला
सिंहवाड़ा (दरभंगा)। प्रखंड क्षेत्र के हरिहरपुर स्थित जगदंबा खेल मैदान में आयोजित श्री श्री 108 दुर्गा पूजा फुटबॉल प्रतियोगिता के दूसरे सेमीफाइनल में रविवार को जेपीएन क्लब सुपौल भीमनगर ने मिथिला स्पोर्ट्स क्लब दरभंगा को 1-0 से पराजित कर फाइनल में प्रवेश कर लिया।
बताया जाता है कि यहां दुर्गा पूजा के अवसर पर लगातार 49 वर्षों से फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। रोमांचक रहा मुकाबला मैच देखने के लिए निर्धारित समय से काफी पहले ही बड़ी संख्या में खेल प्रेमी मैदान में पहुंच गए थे। जैसे ही दोनों टीमें मैदान में पहुंचीं, दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। उत्तर प्रदेश से आए रेफरी द्वारा खेल शुरू करने की घोषणा करते ही दोनों टीमें एक-दूसरे पर हमलावर हो गईं।
बिना योजना के सड़क निर्माण, भुगतान पर रोक के बावजूद चुपके से कर दी गई राशि की अदायगी!
दरभंगा: जिले के सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत शीशो पश्चिमी पंचायत के छोटी मखनाही गांव में सरकारी सड़क निर्माण कार्य को लेकर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, योजना की वैधता और भुगतान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पहले से बनी अच्छी सड़क पर ही दोबारा मटेरियल डालकर निर्माण कार्य की औपचारिकता पूरी कर दी गई। इस मामले में सरकारी राशि के दुरुपयोग और संभावित बंदरबांट की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य को लेकर शुरुआत से ही कई सवाल खड़े हो रहे थे। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित कार्य के लिए किसी स्पष्ट सरकारी योजना की जानकारी उन्हें नहीं थी। इसके बावजूद सड़क पर मटेरियल डालकर कार्य करा दिया गया। अब इस पूरे मामले को लेकर गांव में चर्चा तेज हो गई है और ग्रामीण संबंधित विभाग से जवाब मांग रहे हैं।
बिना योजना के सड़क निर्माण कराने का आरोप
ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, छोटी मखनाही गांव में जिस सड़क पर निर्माण कार्य कराया गया, वह पहले से ही बनी हुई थी और उसकी स्थिति भी ठीक थी। इसके बावजूद उसी सड़क पर दोबारा मटेरियल डालने का काम किया गया। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि सड़क पहले से उपयोग योग्य थी, तो उस पर दोबारा निर्माण कार्य कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत किसी भी निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले योजना का निर्धारण, स्वीकृति, प्राक्कलन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जानी चाहिए। यदि इन प्रक्रियाओं का पालन किए बिना काम कराया गया है, तो यह जांच का विषय है।
हालांकि, इस संबंध में योजना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज, स्वीकृति आदेश और तकनीकी रिपोर्ट की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। संबंधित विभाग के अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य किस योजना के तहत कराया गया और इसके लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई थी।
ग्रामीणों के विरोध के बावजूद जारी रहा कार्य
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क पर मटेरियल डालने के दौरान लोगों ने विरोध जताया था। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संबंधित लोगों को बताया कि सड़क पहले से बनी हुई है और इस पर दोबारा मटेरियल डालने की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया और कार्य जारी रखा गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, निर्माण कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल हैं। उनका आरोप है कि सड़क पर मटेरियल डालकर केवल औपचारिकता पूरी की गई, जबकि काम की वास्तविक आवश्यकता और गुणवत्ता की जांच नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी धन जनता की सुविधा के लिए खर्च किया जाता है। ऐसे में यदि किसी सड़क पर अनावश्यक रूप से दोबारा राशि खर्च की गई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की मौके पर जांच कराई जाए और यह देखा जाए कि काम निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।
BPRO के कथित बयान के बाद भुगतान पर सवाल
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल भुगतान को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों और मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि संबंधित BPRO करुणा कश्यप ने कथित तौर पर स्पष्ट कहा था कि बिना योजना के कराए गए इस कार्य का भुगतान किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा।
लेकिन आरोप है कि बाद में इस कार्य का भुगतान कर दिया गया। यदि ऐसा हुआ है, तो यह जांच का विषय है कि भुगतान किस आधार पर किया गया, किस अधिकारी या कर्मी ने इसकी अनुशंसा की और भुगतान से पहले किन दस्तावेजों की जांच की गई।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब संबंधित अधिकारी ने कथित रूप से भुगतान नहीं करने की बात कही थी, तो बाद में भुगतान की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई? क्या निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई गई थी? क्या माप पुस्तिका तैयार की गई थी? क्या योजना की प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति उपलब्ध थी? इन सभी सवालों का जवाब संबंधित विभाग के अभिलेखों से ही मिल सकता है।
फिलहाल भुगतान किए जाने और योजना की स्थिति से संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इसलिए मामले में निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
सरकारी राशि के संभावित दुरुपयोग की आशंका
सरकारी निर्माण योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। सड़क निर्माण जैसी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना होता है। यदि पहले से बनी सड़क पर बिना पर्याप्त आवश्यकता के दोबारा निर्माण कार्य कराया गया हो, तो इससे सरकारी राशि के उचित उपयोग पर सवाल उठ सकते हैं।
छोटी मखनाही के मामले में भी ग्रामीणों ने इसी आधार पर सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की आशंका जताई है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य की वास्तविक जरूरत नहीं थी और इसके बावजूद राशि खर्च की गई, तो इसकी जांच होनी चाहिए।
हालांकि, केवल ग्रामीणों के आरोपों के आधार पर भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसके लिए योजना की स्वीकृति, कार्यादेश, प्राक्कलन, माप पुस्तिका, भुगतान संबंधी अभिलेख और निर्माण स्थल की तकनीकी जांच जरूरी होगी।
जांच के दौरान यह भी देखा जाना चाहिए कि सड़क की पुरानी स्थिति क्या थी, निर्माण कार्य के लिए कितनी राशि खर्च की गई, मटेरियल की मात्रा कितनी थी और कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हुआ या नहीं।
भारतीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन करेगा शिकायत
इस मामले को लेकर भारतीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन ने भी कार्रवाई की पहल करने की बात कही है। संगठन की ओर से बताया गया है कि मामले की शिकायत जल्द ही जिलाधिकारी से की जाएगी। संगठन का उद्देश्य पूरे प्रकरण की जांच कराना और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग करना है।
संगठन की ओर से जिलाधिकारी से अनुरोध किया जा सकता है कि संबंधित सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही, योजना से संबंधित सभी सरकारी दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की समीक्षा की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि निर्धारित नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य कराया गया या सरकारी राशि का अनुचित भुगतान हुआ, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जाएगी।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि मामले की जांच केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि जांच टीम मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक स्थिति का भी आकलन करे। ग्रामीण चाहते हैं कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, मटेरियल के इस्तेमाल और भुगतान की प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा हो।
उनका कहना है कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित कार्य एजेंसी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसके अलावा, सरकारी योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग की जा रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि ऐसी जांच से न केवल इस मामले की वास्तविकता सामने आएगी, बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता बढ़ेगी।
अब संबंधित विभाग के जवाब का इंतजार
छोटी मखनाही गांव में सड़क निर्माण कार्य को लेकर उठे सवालों के बीच अब संबंधित विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। योजना की स्वीकृति, निर्माण कार्य की जरूरत, तकनीकी मानकों और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
फिलहाल इस पूरे मामले में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित BPRO करुणा कश्यप तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है। उनका आधिकारिक पक्ष मिलने पर उसे खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि जिलाधिकारी और संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच से पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आएगी और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सवाल यही है कि यदि सड़क पहले से बनी हुई थी, तो दोबारा मटेरियल डालने की जरूरत क्यों पड़ी और यदि योजना की स्वीकृति नहीं थी, तो भुगतान किस आधार पर किया गया? इन सवालों का जवाब अब जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही मिल सकेगा।
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