दरभंगा: दरभंगा सदर प्रखंड के अतिहर पंचायत अंतर्गत रामबेरई गांव में जिला परिषद मद से करीब 7 लाख रुपये की लागत से निर्मित छठ घाट के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण पूरा होने के महज छह महीने के भीतर ही घाट के कई हिस्सों में टूट-फूट और धंसने की स्थिति दिखाई देने लगी है। इसे लेकर ग्रामीणों ने दरभंगा जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, मोइन गांव के समीप स्थित पोखर में जिला परिषद सदस्य रिंकी कुमारी की अनुशंसा पर छठ घाट का निर्माण कराया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ ही समय बाद घाट के फर्श और अन्य हिस्सों में दरारें तथा टूटने की स्थिति सामने आने लगी। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया और काम को पूरी तरह से व्यवस्थित तरीके से पूरा नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि निर्माण कार्य आधा-अधूरा छोड़ दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, संबंधित संवेदक से कई बार निर्माण कार्य पूरा कराने और क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त करने का आग्रह किया गया, लेकिन कथित तौर पर लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकारी योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर किसी सार्वजनिक सुविधा का निर्माण कराया जाता है, तो उसका टिकाऊ और मानक के अनुरूप होना जरूरी है। उनका कहना है कि छठ घाट का उपयोग स्थानीय लोग धार्मिक आयोजन के साथ-साथ नियमित रूप से भी करते हैं। ऐसे में घाट के कमजोर होने से लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों ने इसी पोखर के कुछ दूरी पर बने एक अन्य छठ घाट का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार सरकार के पूर्व मंत्री एवं राज्यसभा सांसद संजय झा की अनुशंसा से निर्मित घाट अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों निर्माण कार्यों की स्थिति में अंतर होने के कारण संबंधित योजना की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की जांच जरूरी है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना की राशि के उपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच किए जाने की आवश्यकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की तकनीकी जांच और आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने दरभंगा जिलाधिकारी से मांग की है कि छठ घाट निर्माण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या सरकारी मानकों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों, जेई और संवेदक की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाली राशि जनता के पैसे से आती है। इसलिए निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग और कार्य एजेंसी की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशासन से जल्द जांच कर घाट की स्थिति सुधारने तथा भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है।